Monday, 30 May 2016

Shayari 3



उसे बेवफा कहकर..
हम अपनी ही नजरो में गिर जाते..
क्यूंकि वो प्यार भी अपना था..
और पसंद भी अपनी..


वफ़ा का दरिया कभी रुकता नही,
इश्क़ में प्रेमी कभी झुकता नही,
खामोश हैं हम किसी के खुशी के लिए
ना सोचो के हमारा दिल दुःखता नहीं!..



बर्बाद हुए जिस शहर मे हम चंद
मोहब्बत के लिए...!!!
सुना है वहाँ के पत्थरों को भी हम से
मोहब्बत हो गई है...!!







कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी;
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी;
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने;
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी।


तुम्हारी प्यारी सी नज़र अगर इधर नहीं होती,
नशे में चूर फ़िज़ा इस कदर नहीं होती,
तुम्हारे आने तलक हम को होश रहता है,
फिर उसके बाद हमें कुछ ख़बर नहीं होती.



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